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गाजियाबाद की ‘अविश्वसनीय’ घटना: तेरहवीं के अगले दिन जिंदा लौटा बेटा, जिस शव का किया था अंतिम संस्कार, वह कौन था?

गिरधर के अचानक घर लौटने से अब पुलिस के सामने कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं

डिजिटल न्यूज रिपोर्ट: ग्लोबल भारत न्यूज़

गाजियाबाद की ‘अविश्वसनीय’ घटना: तेरहवीं के अगले दिन जिंदा लौटा बेटा, जिस शव का किया था अंतिम संस्कार, वह कौन था?

गाजियाबाद के वैशाली से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। सेक्टर-5 निवासी गिरधर सिंह बिष्ट, जिन्हें परिजन मृत मानकर तेरहवीं का संस्कार कर चुके थे, 25 जून को अचानक अपने घर के दरवाजे पर जिंदा खड़े मिले। अपनी ही तस्वीर पर माला देख गिरधर खुद दंग रह गए और चिल्ला उठे— “मैं मरा नहीं हूँ, जिंदा हूँ!”

क्या है पूरा मामला?
17 मई को मारपीट के एक मामले में जेल गए गिरधर 21 मई को रिहा हुए, लेकिन घर नहीं लौटे। परिजनों ने गुमशुदगी दर्ज कराई। 12 जून को मसूरी की नाहल झाल में एक अज्ञात शव मिला, जिसे गिरधर के परिवार ने कपड़ों और पुरानी चोट के आधार पर पहचान लिया और सात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा भी दर्ज करवा दिया।.

**पुलिस की कार्रवाई और अब क्या होगा?**

गिरधर के अचानक घर लौटने से अब पुलिस के सामने कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं

* **अज्ञात शव किसका था?* पुलिस अब उस शव की नए सिरे से शिनाख्त करने की कोशिश कर रही है।

* **हत्या का मुकदमा:*

पुलिस ने साफ किया है कि हत्या का मौजूदा मुकदमा खत्म किया जाएगा।

**साजिश की जांच:*

अगर जांच में यह साबित हुआ कि परिवार ने जानबूझकर झूठा मामला दर्ज कराया था, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

**गिरधर का पक्ष:**

पुलिस पूछताछ में गिरधर ने दावा किया कि वह पंजाब के डेरा सच्चा सौदा आश्रम में सत्संग में ध्यान लगा रहे थे। उन्होंने खुद को इंटेलिजेंस से जुड़ा बताते हुए किसी भी परेशानी से इनकार किया है।

**अमन की अपील:**

इस घटना ने स्थानीय लोगों को स्तब्ध कर दिया है। क्या यह पहचान की मानवीय भूल थी या कोई गहरी साजिश? पुलिस प्रशासन अब पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहा है।

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क्या आपको लगता है कि प्रशासन को पहचान प्रक्रिया में और अधिक कड़े नियम लागू करने चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट्स में बताएं।

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